कल यानि की 19-9-2012 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बहुत से स्पीक एशियन निराश और परेशान नज़र आ रहे है ! ऐसा इसलिए हो रहा है क्योकि हम तथ्यों को जाने बिना बहुत ज्यादा उम्मीद लगा बैठते है ! माननीय सुप्रीम कोर्ट के कल के फैसले से हमें तनिक भी बिचलित होने की आवश्यकता नहीं है .क्योकि कल जो भी माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा है वो हमारे समझ से हमारी उम्मीदों से गलत हो सकता है .परन्तु फैसला गलत नहीं हो सकता !यदि हम इस फैसले को भावनात्मक दृष्टी से देखेंगे तो हम दुखी और निराश अवश्य होंगे जो की स्वाभाविक भी है .परन्तु हम जीवन में भावनाओं से नहीं बल्कि तर्क और तथ्य से आगे बढ़ते है ! और माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी तर्क और तथ्य पर ही आधारित होता है! परन्तु यदि तर्क और तथ्य की बात करे तो कल का फैसला हमारे लिए बिल्कुल सही और निष्पक्ष हुआ है ! एक पुरानी कहावत है की " दो घरो का मेहमान भूखा रह जाता है"! यही अब तक हमारे साथ होता आया था! यदि हम कल के मा.सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बात करे जो हमारे समझ में आया है, जहा फैसले के वक्त हम स्पीक एशयन काफी संख्या में मौजूद थे वो ये है की माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की इस मामले को (WRIT383)यहाँ से वापस लिया जाय और निचली अदालत में जहा इसका मामला चल रहा है वहा इसका निपटारा कराया जाय! मेरी समझ के अनुसार माननीय मुंबई हाई कोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट, दो जगह हमारे मामले चलने की वजह से अब तक हमारा मामला किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुच पा रहा था,परन्तु अब मा.सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार मा.मुंबई हाई कोर्ट स्वच्छंद है इस मामले में फैसला लेने के लिए ! बाकी और क्या क्या आदेश है इस आदेश की बृहत् जानकारी तो हमारे कंपनी के कानूनी टीम ही समझ कर आगे की रणनीति तैयार करेगी, और सम्पूर्ण अपडेट के लिए हमें AISPA के अपडेट का इंतज़ार करना चाहिए! मै यहाँ केवल इतना कहना चाहूँगा की जो भी हुआ है वो हमारे पक्ष का फैसला है !मेरी समझ से मा.अदालत का फैसला दोषी ब्यक्तियो के लिए एक बिस्फोट की तरह होता है, जैसे की बिस्फोट की चपेट में आने वाले का छति-बिछती हो जाती है ,मगर मा.सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में हमारी कंपनी के ऊपर कोई आंच नहीं आई, ये हमारे हमारे लिए सकारात्मक और ख़ुशी की बात है !....

यदि मेरे इस पोस्ट में कोई त्रुटी हो तो ग्रुप के सदस्यों से त्रुटी सुधारने का निवेदन करता हु !

.JAI SPEAK ASIA , JAI AISPA ,JAI SPEAK ASIANS !

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