THINK TO BE POSITIVE WP/1127 DISPOSED
सभी मित्रो को नमस्कार, WP/1127/2013 की आज की सुनवाई मेँ माननीय कोर्ट ने जो फैसला दिया हैँ वह बहुत ही सकारात्मक हैँ लेकिन कुछ लोगो को यह फैसला बिलकुल नकारात्मक लग रहा हैँ । अधिकतर लोगो का मानना हैँ कि EOW को बहुत लंबा समय दे दिया गया हैँ । जब मेने भी यह फैसला सुना तो मेरे मन मेँ भी एक पल यही बात आई थी कि EOW को वाकई बहुत लंबा समय मिल गया हैँ । लेकिन जब मेने ठंडे दिमाग से सोचा तो मुझे यह फैसला बहुत ही सकारात्मक और सुकुन भरा लगा । क्योकि रोज- रोज की तारीख से अच्छा हैँ कि एक लंबी अवधि ही सही लेकिन एक समय सीमा तो तय हो गई । अब किसी को बार बार अपडेट के लिये परेशान नही होना पड़ेगा , अब सभी लोग जान चुके हैँ कि चार्जशीट 16 दिसबंर तक जमा हो जायेगी ।


amlsbराख तीन प्रकार की होती है एक चिता की दूसरी चूल्हे की तीसरी आहुति की । पहली राख किसी काम नही आती है उसे घर के अंदर भी नही लाया जाता उससे लोग डरते है वो बाहर ही बाहर विसर्जित कर दी जाती है दूसरी राख चूल्हे की होती है जो बहुत काम आती है घर के बर्तन साफ करने या पेड़ पौधों के कीड़े मारने के या विष्ठा को ढकने के काम आजाती हैपर उस का सत्कार नही होता ।पर तीसरी राख आहुति की होती जो लोगो के माथे पर भभूती के रूप में तिलक करने के काम आती है और बहुत ही पवित्र होती है जिसे लोग मान प्रदान करते है । इसी तरह मनुष्य का जीवनआचरण है। उस का आचरण ही उसे उसका स्थान दिलाता है । जैसे वासना में लिप्त व्यक्ति चिता की राख के सामान है उसे कोई अपने घर नही आने देना चाहता और डरता है की उसका साया भी न पड़े । लेकिन दूसरी व्यक्ति उस तरह के होते है जो बिना मतलब के दुसरो के आगे पीछे टहलते है और माया सुखो को अहमियत देते है इस लिए चापलूसी का काम करते है फिर लोग उनका फायदा उठाते है ।काम निकल जाने पर छोड़ दिए जाते है ।वे चूल्हे की राख समान है । तीसरे व्यक्ति जो अपना जीवन परमात्मा के योग्य है औरो को परमात्मा को पाने की कला को सिखलाते है वे ही सच्चे संत य सद गुरु है व्ही आहुति की राख है ।आप स्वयम को क्या बनाना चाहते है स्वयम पर विचार करे ।आपना जीवन की उपयोगिता समझे हरी ॐ
ReplyDeleteamlsbराख तीन प्रकार की होती है एक चिता की दूसरी चूल्हे की तीसरी आहुति की । पहली राख किसी काम नही आती है उसे घर के अंदर भी नही लाया जाता उससे लोग डरते है वो बाहर ही बाहर विसर्जित कर दी जाती है दूसरी राख चूल्हे की होती है जो बहुत काम आती है घर के बर्तन साफ करने या पेड़ पौधों के कीड़े मारने के या विष्ठा को ढकने के काम आजाती हैपर उस का सत्कार नही होता ।पर तीसरी राख आहुति की होती जो लोगो के माथे पर भभूती के रूप में तिलक करने के काम आती है और बहुत ही पवित्र होती है जिसे लोग मान प्रदान करते है । इसी तरह मनुष्य का जीवनआचरण है। उस का आचरण ही उसे उसका स्थान दिलाता है । जैसे वासना में लिप्त व्यक्ति चिता की राख के सामान है उसे कोई अपने घर नही आने देना चाहता और डरता है की उसका साया भी न पड़े । लेकिन दूसरी व्यक्ति उस तरह के होते है जो बिना मतलब के दुसरो के आगे पीछे टहलते है और माया सुखो को अहमियत देते है इस लिए चापलूसी का काम करते है फिर लोग उनका फायदा उठाते है ।काम निकल जाने पर छोड़ दिए जाते है ।वे चूल्हे की राख समान है । तीसरे व्यक्ति जो अपना जीवन परमात्मा के योग्य है औरो को परमात्मा को पाने की कला को सिखलाते है वे ही सच्चे संत य सद गुरु है व्ही आहुति की राख है ।आप स्वयम को क्या बनाना चाहते है स्वयम पर विचार करे ।आपना जीवन की उपयोगिता समझे हरी ॐ
ReplyDeletehai good news
ReplyDeletethis is not new year this is dead year for poor speakasian
ReplyDeleteIS COMPANY DEAD OR ALIVE.
ReplyDeletePlease return our money back...aise kaise tum log aam logo ke paise kha sakte ho...thodi to sharam rakho...humari mehenat ki kamai h
ReplyDeletechutiya banaya hai ......
ReplyDeleteneed our money back
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